सिंगरौली समाचार कोरोना के कारण संकट में आम लोगों की परेशानी में भी शिवराज सरकार खुद भ्रम और झूठ फैला रही है। सत्य और तथ्य को छुपा रही है। आज ज़ूम के माध्यम से पत्रकारवार्ता में पूर्व पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि भ्रम फैलाने की शरुआत प्रधानमंत्री से होती है। उन्होंने कहा कि जिस मनरेगा को प्रधानमंत्री और पूरी भाजपा कांग्रेस की विफलताओ का स्मारक कहती रही अब उसी मनरेगा के भरोसे श्रमिकों का उत्थान करने की बात कह रहे हैं। मोदीजी ने मनरेगा को गढ्ढे खोदने वाली योजना बताया था। उन्होंने पूछा कि आज जब मनरेगा में पैसे दिये तो क्या गढ्ढे खोदने के लिए दिये हैं ? श्री पटेल ने कहा कि मज़दूरों की पीड़ा की घोर अनदेखी हो रही है। उन्होंने शिवराज सिंह सरकार से पूछा कि जब वो 15 सालों से वे सत्ता में थे तो उन्हें क्यों नहीं मालूम कि असंगठित क्षेत्र में कितने मज़दूर हैं ? इसकी जानकारी साफ-साफ जनता और मीडिया को बताना चाहिए। ऐसे श्रमिकों के लिए नीति या योजना बनाने में सरकार को विषय विशेषज्ञों का सहयोग लेना चाहिए। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने श्रम सिद्धि योजना के सबंध में सवाल किया कि ये मनरेगा से किस तरह अलग है? उन्होंने कहा कि जब विदेशों से आने वालों की जांच हो रही है तो घर वापस हुए मजबूर श्रमिक भाई बहनों की ठीक से जांच क्यों नहीं हो पा रही है ? पूर्व मंत्री ने ग्रामीण मज़दूरों पर आजीविका के घोर संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मज़दूरी की दर दो गुना करने में सरकार को क्या समस्या है ? श्रम कानूनों में सुधार के मामले में पूर्व मंत्री ने कहा कि श्रमिक भाइयों की बिना सहमति लिए कानून में सुधार करना एक तरफा निर्णय गलत है।कमलेश्वर पटेल ने कहा कि 15 सालों में जुमलेबाजी करते हुए अब शिवराज सरकार को गरीब किसानों की कर्ज माफी नहीं दिखती ? बिजली के बिलों में जो कमी आई थी वो नहीं दिखती ? गरीब परिवारों के लिये बढ़ी खाद्यान्न सुरक्षा नहीं दिखती ? बुजुर्गों के लिये बढी पेंशन, कन्या विवाह की बढ़ी राशि, गेंहू की बढ़ी हुई पैदावार नहीं दिखती ? उन्होंने कहा कि जिस माफिया से शिवराज सिंह सरकार परेशान थी उसका खात्मा नहीं दिखता ? पूर्व मंत्री ने कहा कि भाजपा का यही चरित्र है। झूठ बोलते रहो और झूठ प्रचारित करते रहो। जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके भ्रम फैलाते रहो। बातें करते रहो काम मत करो। पहले तो जनता से सच छिपाते थे आजकल तो मीडिया से सच छुपाते हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) छोटे किसानों की मदद करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही एक सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय योजना है. बता दें, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Scheme) से किसान क्रेडिट कार्ड को जोड़ने के बाद से देश के 70 लाख लोगों ने खेती-किसानी के लिए कम दर पर लोन लेने के लिए मन बनाया है. इन सभी किसानों ने केसीसी के लिए आवेदन भी किया है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आकड़ो के अनुसार इन सभी किसानों में से 45 लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड देने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है इसके अलावा 25 लाख किसानों को केसीसी जारी कर दिया गया है. बता दें कि मौजूदा स्थिति में देश के 7 करोड़ किसानों के पास ही किसान क्रेडिट कार्ड है. जबकी सरकार चाहती है कि पीएम किसान योजना से जुड़े सभी किसान साहूकारों की बजाय सरकार से लोन ले. यही कारण है की सरकार केसीसी की बनाने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है. सरकार पीएम किसान योजना के माध्यम से बने केसीसी पर महज 4 प्रतिशत के नाम मात्र के ब्याज पर लोन देती है. अब बैंक किसान को केसीसी कार...

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